जो मेरा था ही नहीं – भाग 1 – तनिश
जो मेरा था ही नहीं – भाग 1 लेखक तनिश का एक भावनात्मक हिंदी उपन्यास है जो प्रेम, संघर्ष, अधूरे सपनों और आत्मसम्मान की कहानी कहता है। छोटे शहर के एक युवक की जीवन यात्रा के माध्यम से यह उपन्यास युवाओं की भावनाओं, रिश्तों और वास्तविक जीवन की कठिनाइयों को संवेदनशीलता से प्रस्तुत करता है।
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“जो मेरा था ही नहीं – भाग 1” लेखक तनिश का एक भावनात्मक और यथार्थवादी हिंदी उपन्यास है, जो प्रेम, संघर्ष, अधूरे सपनों और आत्मसम्मान की गहरी कहानी प्रस्तुत करता है।
यह उपन्यास एक छोटे शहर के युवक की जीवन यात्रा को दर्शाता है, जो बचपन से ही बड़े सपने देखता है। इंजीनियर बनने की आकांक्षा, अपने पहले प्रेम की मासूमियत, और जीवन में आगे बढ़ने का दृढ़ संकल्प—ये सभी भावनाएँ कहानी को जीवंत बनाती हैं। लेकिन जीवन हमेशा सरल नहीं होता। आर्थिक कठिनाइयाँ, सामाजिक दबाव, असफल प्रेम और आत्म-संदेह उसके रास्ते में बाधाएँ बनकर सामने आते हैं।
इस उपन्यास की सबसे बड़ी विशेषता इसका मौन प्रेम है। यहाँ प्रेम का शोर नहीं है, बल्कि भावनाओं की गहराई है जो पाठक को भीतर तक छू जाती है। होली का दृश्य, जहाँ लाल गुलाल अनकहे भावों का प्रतीक बन जाता है, कहानी को विशेष संवेदनशीलता प्रदान करता है।
यह पुस्तक केवल प्रेम कथा नहीं है, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और जीवन की वास्तविकताओं का दर्पण है। तनिश ने सरल भाषा और गहरी भावनाओं के माध्यम से ऐसी कहानी रची है जो युवा पाठकों के अनुभवों से सीधे जुड़ती है।
“जो मेरा था ही नहीं – भाग 1” एक कहानी से अधिक एक अनुभव है—जो पाठकों को जीवन, रिश्तों और अपनेपन के अर्थ पर सोचने के लिए प्रेरित करता है।
Product Details / Highlights
Author: तनिश (Tanish)
Title: जो मेरा था ही नहीं – भाग 1
Genre: Fiction / Emotional / Youth Literature
Pages: 100
Language: Hindi
Format: Paperback
Target Readers: Young adults, Hindi literature readers, and readers interested in emotional and realistic stories
About the author
तनिश का जन्म वर्ष 2003 में दिल्ली में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कासगंज जनपद में हुई। विद्यार्थी जीवन से ही उनके भीतर लेखन, संवेदनशीलता और रचनात्मक अभिव्यक्ति की प्रवृत्ति दिखाई देने लगी थी।
उन्होंने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बीटेक की पढ़ाई शुरू की, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने कला संकाय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और आगे चलकर हिंदी विषय में परास्नातक अध्ययन आरंभ किया।
तनिश का लेखन युवा मनोविज्ञान, सामाजिक यथार्थ, संघर्ष और आत्मसम्मान जैसे विषयों पर केंद्रित है। उनका उद्देश्य केवल कहानी कहना नहीं, बल्कि समाज और युवा पीढ़ी के अनुभवों को शब्द देना है।
उनकी रचना “जो मेरा था ही नहीं – भाग 1” एक ऐसे युवा की कहानी है जो सपनों और परिस्थितियों के बीच संघर्ष करते हुए अपने जीवन का रास्ता खोजने की कोशिश करता है।